मंगलवार, 5 जुलाई 2022

बात चलती है, तो दूर तक जाती है, Baat Chalti hai to dur tak jati hai

 

बात चलती है, तो दूर तक जाती है।

बात चलती है, तो दूर तक जाती है, Baat Chalti hai to dur tak jati hai

 

 

एक गांव के दो परिवारों में बहुत घनिष्ठता थी। दोनों परिवार के लोग एक-दूसरे के यहां आते-जाते थे, उठते-बैठते थे। यदि कभी एक परिवार परेशानी में होता था, तो दूसरा परिवार उसकी मदद करने को तैयार रहता था। गांव में किसी से कहा-सूनी हो जाए या झगड़ा हो जाए, तो दोनों परिवार मिलकर मुकाबला करते थे। उनकी एकता पूरे  गांव को मालूम थी।

यदि कभी इन दोनों परिवारों में किसी एक के यहां कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम होता या तीज-त्यौहार आता तो एक-दूसरे के यहां निरमंत्रण देते और साथ-साथ खाना खाते थे। काम-काज और रुपए-पैसों के लेन-देन में भी ये परिवार आपस में एक-दूसरे का सहयोग करते थे। ये इतने करीब आ गए थे कि एक-दूसरे की अच्छाइयों और कमियों को जान गए थे। किसी तरह का पर्दा नहीं रह गया था। यानी जो बातें गांववालों को राज थीं, एक पहेली थीं वे आपस में भली प्रकार जानते थे। एक-दूसरे की रहस्यमयी बातें भी आपस में छुपी रह नहीं गई थीं।

इन दोनों परिवारों की आपसी मित्रता गांव के तमाम लोगों की आंखों में खटकती थी। वे इसी उधेडबुन में रहते थे कि किसी तरह ये अलग-अलग हो जाएं। कुछ ऐसे भी लोग थे जो इन दोनों परिवारों की मित्रता से प्रसन्न थे और समय-समय पर इनके मित्रता की मिशाल देते थे।

कई साल बाद ऐसा समय आया के गांव के कुछ लोगों ने इन दोनों परिवारों में अनबन करा दी और उनकी आपसी मित्रता समाप्त हो गई । अब छोटी-से-छोटी बात पर आपस में लड़ने-झगड़ने को तैयार हो जाते थे। लेकिन किसी तरह लड़ाई-झगडे की नौबत टल जाती थी।

एक दिन ऐसी कहासुनी हुई कि एक-दूसरे के गड़े मुरदे उखाडने लगे। बातें दादों-परदादों तक पहुंचने की नौबत आ गई, तो एक ने कहा, "देख, झगड़ा मुझसे हो रहा है मुझसे कह । मेरे बाप-दादों तक मत जाना। नहीं बहुत बुरा हो जाएगा। "

दोनों में तू-तू मैं मैं सुनकर लोग इकट्ठे हो गए थे। इसी बीच भीड़ में से एक बुजुग्ग बोल पड़े, "भाई! जब बात चलती है, तो दूर तक जाती है'।“

तुम लोग लड़ना-झगड़ना बंद क्यों नहीं कर देते ।"

उस बुजुर्ग की बात उनके कुछ समझ में आई और वे चुपचाप अपने अपने घर चले गए।

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