एक अनार सौ बीमार
एक बार ऐसा मौसम आया कि नगर में लोग परेशान हो गए । सर्दी के समाप्त होते ही कड़ाके की गर्मी पड़ी । ऐसे मौसम में तमाम लोग बीमार पड़ गए । अधिकतर लोगों को बुखार आने लगा। ऐसा बुखार कि उतरने का नाम ही न लेता और शरीर को कमजोर बना देता। बुखार के साथ शरीर में दर्द भी शुरू हो गया। बीमारों को भूख लगना बंद हो गई।
वैद्यों ने मरीजों को अधिक से-अधिक फल खाने को कहा। गरीब परिवारों को लगातार फल खिलाना मुश्किल हो रहा था। गरीबों को तो दाल-रोटियों से ही पेट भरना आसान न था, फिर भी जितना संभव हो सकता था, फल दे रहे थे। संपन्न लोग ही अपने मरीजों को फलों की पूरी खुराक दे रहे थे।
नगर में परचून की दुकानों से अधिक भीड़ फलों की दुंकानों पर हो रही कोई बाहर का आदमी उस भीड़ को देखकर एक बार ऐसा सोचने लगता था कि इस नगर के लोग फलों के पसंद मिजाज हैं और खाने के साथ-साथ फलों का सेवन करते हैं। पहले फलों को लेकर चलना संपन्नता की प्रतीक माना जाता था लेकिन इस समय कोई फलों को खुले रूप में लेकर नहीं चलता था। इस समय जिसके हाथ में फल देखे जाते थे, तो समझा जाता था कि इसके यहां कोई बीमार है।
अब यह होने लगा कि दुकानों पर भीड़ बनी रहती और फल सब बिक जाते। एक दिन ऐसा हुआ कि एक फल की दुकान पर अनार खरीदने वालों की संख्या अधिक हो गई। देखते-ही-देखते दुकानदार के सब अनार बिक गए। अंत में दुकानदार के पास एक ही अनार बच रहा। अनार लेने वालों की आवाजें आने लगीं । दुकानदार ने ग्राहकों से जरा रुकने के लिए कहकर अपने नौकर से कहा, "जरा देखना, अनार टोकरियों में और तो नहीं पड़े हैं? यदि पड़े हों तो जल्दी लाओ।" इतना कहकर दुकानदार ने अन्य लोगों से पूछा, "आप बोलिए, आपको क्या चाहिए?" उसने कहा, "अनार।"
फिर दुकानदार ने दूसरे से पूछा। उसने भी कहां, "अनार।" इस दुकानदार ने देखा कि अधिक लोग अनार के लिए खड़े हैं । दुकानदार अन्य लोगों को दूसरे फल तौल-तौलकर देता रहा। थोड़ी देर में नौकर आकर बोला कि अनार समाप्त हो गए हैं। एक भी अनार नहीं मिला। तमाम लोग आवाज लगा रहे थे। एक ही सही। "यह अनार मुझे दे दो।" कोई कहता, "मैं पहले से खड़ा हं। अनार मुझे देना।" कुछ पैसे निकालकर दे रहे थे और अनार मांग रहे थे। दुकानदार बड़ा असमंजस पड़ गया। किसे दूँ? किसे न दूँ? और मन में सोचा-हे भगवान, क्या करूं? "एक अनार सौ बीमार'। दुकानदार ने वह अनार नौकर को देते हुए कहा, ले जाओ । इसे अंदर रख दो।" और उसने भीड़ से कहा, "अनार नहीं है। कोई दूसरा फल बोलो।"
