गुरुवार, 23 जून 2022

बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी Bakre ki amma kab tak kher manayegi

 

बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी

बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी Bakre ki amma kab tak kher manayegi

 

 

एक परिवार में दो छोटे बच्चे थे। तीन वर्ष और पांच वर्ष के । एक दिन बच्चों के दादा एक बकरी खरीद कर लाए। पहले तो बच्चे बकरी से दूर-दूर रहते थे। जब वह सींग मारने को गरदन टेढ़ी करती, तो बच्चे भाग खड़े होते । कुछ दिन बाद इस बकरी ने एक बच्चे को जन्म दिया । उन बच्चों ने उसे बड़े प्यार से देखा। थोड़ी देर में ही वह खड़ा होकर मिमियाने लगा। उन बच्चों को बड़ा आश्चर्य हुआ। दो-एक घंटे बाद वह धीरे-धीरे कुदकने भीलगा। दोनों बच्चे प्रसन्न होकर उसे देखते रहे। उनकी इच्छा हुई कि बकरी के बच्चे को छूएं लेकिन बकरी के डर से वे पास नहीं गए ।

सुबह होते ही दोनों बच्चे बकरी के पास पहुंच गए। उनके दादा बकरी के बच्चे को पकड़कर बच्चों के पास्स ले गए। बकरी के बच्चे को दोनों ने छेड़ना शुरू कर दिया । कुदक कुदककर भागने लगा । दोनों बच्चे उसके साथ खेलने लगे। थोड़े दिनों में ही वह बच्चों का साथो बन गया। दोनों उस बच्चे के साथ खेलते रहे। बच्चों का उसके साथ बहुत अपनापन हो गया था। उसके दुख-सुख से बच्चे द्रवित हो जाते थे।

अब बच्चा बकरी की तरह ही बड़ा हो गया था। जब ईद का त्यौहार आने वाला हआ, तो उस बच्चे को खूब खिलाया जाने लगा। घर वालों की देखा-देखी बच्चे भी उसे खूब प्यार करने लगे थे। बकरी का बच्चा पूरा बड़ा हो गया था। अब उसे घर के बच्चा न कहकर बकरा कहने लगे थे। बकरी अपने बच्चों को बड़े होते ही खोती आ रही थी। इस समय भी बकरी को लग रहा था कि इसका भी समय निकट है। बकरी दुखी रहने लगी।

घर के लोग बकरी को दुखी देखने लगे । एक दिन घर के बच्चे ने दादा से पूछ लिया कि यह बकरी दुखी क्यों है? दादा के पास कोई माकूल जवाब नहीं था। लेकिन उत्तर तो देना ही था । दादा ने उत्तर देते हुए कहा कि बकरीद आ रही है। उस दिन कुरबानी दी जाएगी । वैसे भी बकरा एक न-एक दिन कटता ही है। यह तो बनाया ही गया है काटने के लिए । बकरी की ओर

देखते हुए फिर बोले, "बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी"।

इतना कहकर दादा चुप हो गए ।

 

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