तेरा ही चुन्न तेरा ही पुन्न, मेरी तो हवा ही हवा है
Tera Hi chunna Tera hi Punna
गांव में एक नाई था। किसी के यहां विवाह हो या कथा । जन्मदिन हो या अन्य कोई संस्कार संबंधी कार्य। नाई घर-घर जाकर बुलावा देता था। विवाहों में लड़का-लडकी देखने से लेकर विदाई तक वह चकरघिन्नी की तरह लगा रहता था। उनमें होने वाली दावतों में शामिल होता था। लड़के के जन्म की खुशी में गांव वाले नाई से दावत मांगते तो वह इस कान सुनता उस कान निकाल देता।अब गांववाले उसे चिढ़ाते हुए कहते, "नाऊ ठाकुर, तुम सबके यहां दावतें उड़ाते हो। तुम कभी दावत नहीं खिलाते।"
जब नाई ने देखा कि गांव के लोगों का बार-बार कहना अब सहन नहीं होता है, तो वह चिंतित और परेशान-सा रहने लगता। हमेशा सोचा करता कि गांववालों की इस बात से छुटकारा कैसे मिले। जब कभी वह बुरा मानकर गुस्सा होकर किसी से कुछ कह देता, तो लोग मरहम लगाते हुए उससे कहते, "यार, मैं तो मजाक कर रहा था।" लगातार सोचने पर उसने दिमाग में इसका हल निकाल लिया।
अब जब भी कोई उससे दावत की बात करता, तो वह कहता कि जल्दी ही दावत खिलाऊंगा। एक दिन उसने दावत की तिथि तय कर दी और दावत के लिए वह लोगों को उसी तिथि का न्योता दे देता। जब दो- चार दिन रह गए, तो वह गांव के लोगों के पास गया। वह लोगों से दावत में काम आने वाले बर्तनों को मांग लाया। दूसरे दिन थालियां, कटोेरियां, लोटे आदि भी यह कहकर मांग लाया कि इसमें आप लोग ही भोजन करेंगे, बाद में वापस कर देंगे। नाई से दावत खाने के लालच में सबने बर्तन दे दिए।
एक रात को उसने सब बर्तनों को बोरों में भरकर बैलगाड़ी में लाद लिये और निकल गया शहर को। उसने सब बर्तनों को बेचकर दावत का सामान खरीदा और दोपहर तक गांव आ गया। बैलगाड़ी में दावत का सामान देखकर गांववाले खुश हो गए। उसके यहां दावत के एक दिन पहले से मिठाइया बननी शुरू हो गई । गांव के तमाम लोगों ने भोजन बनाने में सहयोग दिया।
दावत के दिन सुबह से ही खाने वालों का जमावड़ा लग गया था। पूरिया, कचौरियां, दही-बूरा, रायता, पंचमेल मिठाइयां आदि तमाम पकवान दावत में थे। दावत पत्तलों और मिट्टी के सकोरों-कुल्हडों में दी जा रही थी। दावत अच्छी होने की खुशी में अधिकतर लोग अपने-अपने दिए गए बर्तनों की बात भूल गए। लोग पंक्ति में बैठे हुए थे। नाई उन पर पंखे से हवा करता चल रहा था।
तमाम लोग इतनी अच्छी दावत के लिए धन्यवाद दे रहे थे। जो उसे धन्यवाद देता, उससे वह एक ही बात कहता- 'तेरा ही चुन्न तेरा ही पुन्न,
मेरी तो हवा ही हवा है' ।
