सौ सयानों का एक मत, सौ मूर्खों के सौ मत
एक राज्य में सुरक्षा की व्यवस्था बहुत कमजोर थी। इसलिए राजा बहुत चिंतित था। उसके पड़ोसी राजा उसे तंग किया करते थे। इस स्थिति से निबटने के लिए राजा ने मंत्रियों के साथ बैठक की। उस बैठक में सेना और सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श लंबे समय तक चलता रहा। अंत में सब लोग इस बात पर सहमत हुए कि सेना में अच्छे युवकों को शामिल किया जाए। युवक चाहे कम हों, लेकिन वीर, बुद्धिमान और समझदार हों।
एक दिन राजा ने मंत्री से कहा कि सेना में भर्ती के लिए राज्य में मुनादी पिटवा दो। राजा के कहने के अनुसार मुनादी पिटवा दी गई । निश्चित तारीख पर हजारों की संख्या में नवयुवक आ गए। नवयुवकों के ठहरने का उचित प्रबंध किया गया था।
राजा और मंत्री ने सेना के लिए युवकों की संख्या पहले ही तय कर ली थी। आए हुए युवकों में से सेना में लिए जाने वाले युवकों की संख्या से दोगुने चुनकर रोक लिए गए । बाकी युकवक अपने-अपने घर चले गए।
मंत्री ने रोके गए युवकों की दो तालिकाएं बनवा ली थीं। प्रत्येक तालिका में बराबर-बराबर युवक थे। इनके परीक्षा- स्थल ठहरने की जगह से थोड़ी ही दूर पर थे। शाम होते ही दोनों तालिकाओं के युवकों को अलग-अलग परीक्षा स्थलों पर भेज दिया गया।
परीक्षा-स्थल दो अलग-अलग जगह थीं। दोनों जगहों पर एक-एक शामियाना लगवा दिया गया था। उनमें जाजम बिछवा दिए गए थे । दोनों शामियानों में बीच में एक-एक तख्त बिछा दिए गए थे। तख्तों पर गलीचे बिछा दिए गए थे।
रात होते ही राजा और मंत्री पहले शामियाना में पहुंचे । राजा ने मंत्री को इशारा किया तो मंत्री ने युवकों से कहा, "देखिए, आज आप लोग यहां विश्राम करेंगे। आप सब में जो सबसे बड़ा और समझदार है, वह इस तख्त पर सोएगा। इसका चुनाव आप सब मिलकर करेंगे।" पहले शामियाना से निकलकर राजा और मंत्री दूसरे शामियाना में पहुंचे। वहां जाकर युवकों से वहीं सब कहा जो पहले शामियाना में कहा था। अपनी बात कहकर वे उस शामियाना से भी बाहर निकल आए।
पहले शामियाना में अधिकतर युवकों को नींद आने लगी थी। कुछ चालाक और समझदार युवकों में इस बात की कानाफूसी होने लगी कि तख्त पर कौन सोएगा? इसका हल निकालने के लिए उन्होंने शामियाने के लोगों को लगभग दस समूहों में बांट दिया और कहा गया कि आप लोग एक एक व्यक्ति को चुन लीजिए। फिर चुने हुए दस लोग आपस में बात करके एक व्यक्ति को चुनेंगे।
बड़ी मुश्किल से प्रत्येक समूह से एक-एक युवक चुना गया । फिर चुने हुए युवकों की बैठक हुई । सबने अपनी- अपनी प्रतिष्ठा और बुध्दि का बखान किया। जब सब अपनी-अपनी बात कह चुके, तो खामोशी छा गई । कोई भी अन्य किसी को अपने से अधिक समझदार और बुद्धिमान मानने को तैयार नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद प्रत्येक अपने को सबसे अधिक समझदारऔर बुद्धिमान कहने लगा । पूरी रात इसी तरह लोग आपस में तर्क-कुतर्क देते रहे। अंतत: सुबह हो गई और कोई निर्णय नहीं हो सका।
दूसरे शामियाने में भी युवक आपस में बातें करने लगे थे। एक युवक ने खड़े होकर कहा, ' भाइयो, हम लोग आपस में बात करके चार-पांच साथी चुनें जो हम सबके सरदार बन सकते हों। फिर वे चार-पांच साथी खडे होकर अपनी-अपनी बात कहें। सबके बोलने के बाद हम सब फिर आपस में बातें करके इनमें से किसी एक को चुनेंगे। वही हम सबसे बड़ा और समझदार होगा। वही हमारा सरदार होगा। '
इस प्रकार दूसरे शामियाने के युवकों ने अपना सरदार चुन लिया। चुने हुए युवक ने सबको धन्यवाद देत हुए कहा, "साथियो, यह बड़ी प्रसन्नता की बात है कि आप सब साथियों ने एकजूटता और समझदारी का परिचय दिया है। मुझे सरदार चुना, आप सबका आभारी हूं। मेरी दृष्टि में हम सब बराबर हैं। हममें न कोई छोटा है और न कोई बड़ा। इसलिए इस तख्त पर कोई नहीं लेटेगा। हम सब जमीन पर बिछी जाजम पर लेटेंगे।" इतना कहकर सरदार युवक अपनी जगह आकर बैठ गया। कुछ देर तक आपस में बातें करते रहे, फिर सो गए।
सुबह होते ही राजा और मंत्री, दोनों पहले शामियाना में जा पहंचे। उनके पहुँचते ही सब शांत हो गए। दोनों ने देखा कि तख्त पर कोई नहीं लेटा था । एक बार चारों और नजर घुमाकर राजा ने कहा, "इस तख्त पर जो सोया हो, हमारे पास आए।" शामियाने में सन्नाटा छा गया। जब कोई सोया ही नहीं, तो बोले कौन। जब कोई नहीं बोला, तो राजा ने एक युवक से पूछा, तुम बताओ, इस पर कौन सोया था?" उस युवक ने हाथ जोड़ते हुए कहा, "महाराज, इस पर कोई नहीं सोया। हम सब रात-भर ऐसे ही जागते रहे हैं।" राजा ने मंत्री की ओर देखा और फिर युवकों की ओर देखते हुए कहा, आपमें से कोई भी एक बड़ा, समझदार नहीं हो सका या आपमें से कोई छोटा नहीं बनना चाहता है । यानी कि आप लोगों में कर्तव्य की भावना कम है। हम भी बड़े असमंजस में हैं। ऐसी स्थिति में आप सबको छोटा बनाकर किसी एकको बड़ा नहीं बना सकता।" इतना कहकर वे शामियाने के बाहर चले गए।
पहले शामियाने से निकलकर सीधे दूसरे शामियाने में जा पहुंचे। वहां सब जाग गए थे और स्नानादि करके बैठे हुए थे। राजा ने युवकों से पूछा कि नींद कैसी आई? सबने कहा कि अच्छी नींद आई। यह सुनकर राजा और मंत्री को बड़ा आश्चर्य हआ। राजा ने युवकों से फिर पूछा, "इस तख्त पर कौन सोया था?" सबने कहा कि कोई नहीं। फिर राजा ने पूछा, "क्या लोगों ने किसी व्यक्ति को नहीं चुना था?" सबने कहा कि चुना है महाराज लेकिन उसी सरदार ने कहा था कि हम सब बराबर हैं। हममें कोई छोटा-बड़ा नहीं है। इसलिए सब धरती पर सोएंगे। राजा ने कहा, "हमारे राज्य को ऐसे ही होनहार युवकों की जरूरत है। अत: आप सबको नौकरी में रखा जाता है।
राजा ने मंत्री की ओर देखते हुए कहा, "देखा मंत्री जी, 'सौ सयानों का एक मत, सौ मूखों के सौ मत'।
