मंगलवार, 21 जून 2022

हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा आय Harr lage na fitkari rang chokha aay

 

हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा आय

हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा आय Harr lage na fitkari rang chokha aay

 

 

वसंत का मौसम था। नगर में रंग-बिरंगे कपड़े पहने जाने लगे थे। महिला रंगी हुई चुनरियां और कुरतियां पहनने लगी थीं। बच्चे भी रंग-बिरंगे कपड़े पहनने लगे थे। रजाइयां और खेस रंगे जाने लगे थे। कृुछ लोग घर पर ही रंग लेते थे लेकिन जो सुंदरता रंगरेज के रंगने में आती थी, वह भला घर पर रंगे कपड़ों में कहां। इसीलिए अधिकतर लोग रंगरेजों से कपड़े रंगा रहे थे।

दीनू् की ताई की इच्छा वर्षों से चली आ रही थी कि किसी रंगरेज की रंगी चमकदार चूनरी पहनूं लेकिन आस पूरी नहीं हो पा रही थी। एक दिन जब वह बाजार से अपने घर वापस आ रही थी। रास्ते में रंगरेज की दुकान मिली। दुकान के नाम पर दो-एक रंगने वाले बर्तन, एक लोटा और एक लकड़ी की रंगों वाली सन्दूकची। संदूकची में कई खाने थे। उन खानों में अलग-अलग रंग और रंग में मिलाए जाने वाले चूर्ण थे। दरवाजे से दूर एक पेड़ में रस्सी बंधी थी। उस पर कुछ रंगे हुए कपड़े सूख रहे थे। जब वह रंगरेज की दुकान से कुछ दूर थी, उसके मन में एक विचार आया कि क्यों न चूनर रंगने के पैसे पूछ ले।

 जब वह दुकान के करीब आई तो उसने चूनर की रंगाई के पैसे पूछे। जब रंगरेज ने पैसे बताए तो वह बोली, "भैया, पैसे ज्यादा हैं ।" कहकर आगे बढ़ गई । रंगरेज की दुकान मकान में ही थी। रंगरेज का बाप दुकान के बाद ही चारपाई पर बैठा था। वह उस औरत को मोलभाव करते देख रहा था। चारपाई के बराबर आते ही उसने उससे कहा, "क्या रंगाई के पैसे पूछ रही थी?"" वह बोली, "हां, बाबा। पैसे अधिक बता रहा है। ' इतनी बात सुनकर उसने उससे कहा,"रंग अच्छा और पक्का बनाने के लिए हर और फिटकरी का इस्तेमाल किया जाता है। तुम्हें तो एक चूनर रंगनी होगी। रंग में पिसी हल्दी डालकर चूनर रंग लेना। चोखा रंग हो जाएगा।"

उसने एक दिन ऐसा ही वकिया। पानी में रंग और पिसी हुई हल्दी डालकर पानी को चला दिया और उसमें चूनर भिगोकर रख दी। थोडी देर बाद चूनर निचोड़कर सुखाने डाल दी। धूप निकली थी । थोड़ी देर में चूनर सूख गई ।

एक दिन वह रंगी चूनर को ओढ़े बाजार से वापस आ रही थी। रास्ते में फिर वही रंगरेज की दुकान आई। उस रंगरेज ने उसे पहचान लिया और कहा, "चूनर का रंग तो अच्छा है। चूनर की रंगाई के कितने पैसे दिए थे?" रंगरेज की बात सुनकर वह बोली, "नहीं भैया। आगे चारपाई पर जो बाबा बैठे हैं। उन्होंने बताया था कि रंग में हल्दी  डालकर चूनर रंग लेना। वैसा ही मैंने किया था भैया। "

इस पर रंगरेज ने कहा, '" ठीक बताया था बाबा ने।' हर्र लगे ने फिटकरी, रंग चोखा आय' । "हां भैया'' कहा और वह आगे बढ़ गई।

 

 

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