सोमवार, 9 मई 2022

मियां की जूती, मियां का सर Miyan ki jooti miyan ka sar

 मियां की जूती, मियां का सर

 

 

मियां की जूती, मियां का सर

 

एक मियां थे । बड़ी किफायत से खर्च किया करते थे। वे सीधे-सादे इंसान थे। उनकी हलकी हवादार जूतियां फट गई थीं। उनको कई बार गंठवाया जा चुका था। अब और गंठवाने की गुंजाइश नहीं रह गई थी। अब उन्हें दूसरी जूतियां खरीदना जरूरी हो गया था। वे कभी नंगे पैरों नहीं निकलते थे। घर में टहलना, कूचे में आना-जाना, सैर सपाटा करना आदि के लिए वे जूतियां ही पहनकर निकलते थे।

जूतियां खरीदने का जैसे मुहुरत निकल आया हो। उन्होंने कुछ पैसे जेब में डाले और चल दिए जूतिरयां खरीदने । मियां ने बाजार में कई दुकानें खंगाल डालीं । उन्हें सस्ती और अच्छी जूतियां कहीं नजर नहीं आई । अब मियां ने सोचा कि चलते हैं, फिर किसी दिन आते हैं। यह सोचकर मियां चल दिए।

मुश्किल से सौ कदम आगे चले होंगे कि एक जूतियों की दुकान नजर आई । मन नहीं माना मियां का। सोचा, इस दुकान में और देख लेते हैं और उस दुकान पर पहुंच गए । पच्चीसों जोड़ियां देखने के बाद एक जोड़ी पसंद आ गई । और पैसे भी मियां को वाजिब लगे। पैसे दिए और जूतियां घर लेकर आ गए।

सुबह जब मियां स्नान करके बैठे ही थे कि अजान की आवाज सुनाई दी। वे नवाज के लिए तैयार हुए और नई जूतियां पहनकर मस्जिद जा पहंचे। नमाज अता करके जब वे वापस आए, तो चकरधिन्नी हो गए। कभी इधर देखते, कभी उधर देखते लेकिन उनको अपनी जूतियां नजर नहीं आ रही थीं। एक बार फिर उन्होंने इधर-उधर देखा, वास्तव में वहां जूतियां नहीं थीं। आखिर में हारकर वे नंगे पैरों ही वापस आ गए |

मियां को जूतियां खो जाने बड़ा मलाल था। अब वे पुरानी गठी हुई जूतियों को पहनकर निकलने लगे । जूतियों को खरीदे चार दिन ही हुए थे। वे घर से निकलकर कृचे में आए । कूचे से निकलकर गली में आए ही थे कि उनकी नजर एक युवक पर पड़ी। उस युवक के पैरों की ओर नजर गई, तो सन्न से रह गए मियां । गली में इधर-उधर मियां के जान-पहचान के लोग बैठे थे।

मियां उस युवक के सामने जाकर रुक गए और एकटक उन जूतियों को देखते रहे। वह युवक बोला, "मियां, क्या देख रहे हो?" मियां ने उस युवक की ओर देखते हुए कहा, '" जनाब, ये जूतियां आपने किस दुकान से खरीदी है? वह युवक झगडालू था इसीलिए वह आग-बबूला हो गया और बोला- "इस सवाल का क्या मतलब है मियां? तुम्हारा सिर तो नहीं फिर गया है? मैंने किसी भी दुकान से खरीदी हों। आपको क्या मतलब?"

तू-तू मैं मैं सुनकर कई लोग पास आ गए और दोनों को समझाने-बुझाने लगे। मियां बोले, "ये जूतियां मेरी हैं । चार दिन पहले मस्जिद के दरवाजे से कोई उठा लाया था। '" इतना कहना था कि वह फिर आग-बबूला हो गया  और जूती हाथ में लेकर बोला, "मुझे चोर बताता है। मैं तेरी जूतियां चुराकर लाया हूं। इतना कहवकर वह मियां पर झपट पड़ा। लोगों के बचाते-बचाते मियां के दस-बारह जुतियां पड़ चुकी थीं। मियां, "देखिए जनाब। देखिए  जनाब।' कहते रहे।

सब लोगों ने उस युवक से कहा कि इस तरह से पेश नहीं आना चाहिए शा। चलो यहां से। नहीं तो अभी बवाल खड़ा हो जाएगा। उसने हाथ की जूती जमीन पर पटकी, पहनी और आगे बढ़ गया।

सब लोगों ने मियां को समझाते हुए कहा कि वह बवाली है । तुम्हें उससे बहस नहीं करनी चाहिए थी । जाओ मियां। इस तरह के हादसे जिंदगी में हो जाया करते हैं। मियां धीरे-धीरे घर की ओर चल दिए लोग आपस में बतिया रहे थे। मियाँ जी झूठ नहीं बोलते। ये उनकी ही जूतियां थीं। बवाली जो ठहरा। नई जू्तियां देखकर ले आया होगा। अंत में एक व्यक्ति बोला, " देखो कैसा इत्तफाक हैं, मियां की जूती, मियां का सर'

बेचारा मियां। "

 

 

 

 


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